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ध्यान और अध्यात्म का केंद्र अल्मोड़ा

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ध्यान और अध्यात्म का केंद्र अल्मोड़ा कुमाऊं पर्वत श्रंखला कि एक मुख्य जगह है। कुमाऊं की यात्रा बिना अल्मोड़ा के पूरी नहीं हो सकती। पहाड़ पर बसा अल्मोड़ा बहुत शांत और मनमोहक है। इतना शांत की आपका ध्यान सिर्फ अल्मोड़ा की हसीन वादियों में ही लगा रहेगा और इतना मनमोहक है कि आपका मन कहीं और जाने को नहीं करेगा।

समुद्र तल से 1642 मीटर की ऊंचाई पर होने के कारण यहां का मौसम साल भर सुहावना बना रहता है। अल्मोड़ा में धार्मिक स्थलों के साथ-साथ यहां पर्यटन की दृष्टि से भी बहुत कुछ है।

यहां के लोगों का कहना है कि यहां तीन चीजों का विशेष महत्व है माल, बाल और पटाल।

माल अथार्त:- यहाँ की लड़कियों की सुंदरता जिसको यहाँ माल कहा जाता है।

बाल अथार्त:- इससे आप समझ ही गए होंगे.? यहाँ की विश्व विख्यात बाल मिठाई जिसके चर्चे भारत ही नहीं दुनिया में होते है।

पटाल अथार्त:- पहाड़ के कटे हुए बड़े बड़े पत्थर, पहले यहां घर गली इसी से बनते थे।

यहां का दशहरा भी विश्व विख्यात है। सभी मंडली अपना अपना पुतला बनाकर  बाजार में घूमती हैं और इसकी यहां प्रतियोगिता भी होती है जिसका सबसे ज्यादा बड़ा और बढ़िया पुतला होगा उस मंडली को विशिष्ट अतिथि द्वारा सम्मानित किया जाता है पिछली बार केंद्रीय गृह मंत्री किरण रिजु जी ने यहां आकर सम्मानित किया था।

दशहरे का एक दृश्य

गंगनाथ मंदिर:- अल्मोड़ा से तीन-चार किलोमीटर की दूरी पर बना गंगानाथ जी का मंदिर अपने आप में बेहद खास महत्व रखता है। इसके बारे में कहा जाता है कि अल्मोड़ा के चंद जा के दिवान जोशी की लड़की भाना का रोटी के राजकुमार गंगानाथ से प्रेम संबंध हो जाता है। ( गंगनाथ डोटी नेपाल वैभव चंद के शिवजी द्वारा वरदानित एकमात्र पुत्र थे।) कुछ समय के बाद अपने गुरु गोरखनाथ से शिक्षा लेकर जोगी के भेष में विद्याएं प्राप्त कर गंगनाथ राजपाठ का मुहूर्त छोड़कर अल्मोड़ा की ओर निकल पड़ता है। गंगा नाथ जी के शरीर में गुरु गोरखनाथ द्वारा प्रदान दिव्य वस्त्र तथा पीठ भाई गोरिल द्वारा दी गई शक्ति है। जिसके रहते हुए उनका कभी अनिष्ट नहीं हो सकता। जोशी दिवान को जब भाना गंगनाथ के प्रेम प्रसंग के बारे में मालूम होता है तो वह भाना गंगनाथ और वर्मी बाला को मौत के घाट उतारने की योजना बनाता है। यह सारा कार्य होली के दिन पूरा होता है। धोखे से गंगनाथ का सिर धड़ से अलग कर दिया जाता है फिर तीनों की निर्मम हत्या कर दी जाती है मरने से पूर्व वरना श्राप देती है कि पर्वत का वह अंचल सूख जाएगा और हरियाली नष्ट हो जाएगी। इस सब सबसे डर खाकर बाद में यहां देवताओं के रूप में स्थापना की जाती है।

गंगनाथ जी का मंदिर

नंदा देवी मंदिर: अल्मोड़ा शहर के व्यस्त बाजार के बीचो बीच यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए बड़ा श्रद्धा का केंद्र है नंदा अथार्थ मां पार्वती का यह मंदिर बेहद शानदार है। इसका प्रांगण बड़ा होने के कारण शाम को मंदिर में काफी चहल पहल रहती है और बच्चे खेलते हैं।

नंदा देवी मंदिर का प्रवेश द्वार

नंदा देवी मंदिर

मंदिर प्रांगण

चितई गोलू देवता मंदिर:- जो अल्मोड़ा से लगभग 10 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है। गोलू देवता को यहाँ न्याय का देवता भी कहा जाता है। कहा जाता है कि सब जगह से ठोखर खाकर जब लोग यहाँ बाबा के दरबार में अर्जी लिखकर लाते है तो उनकी मनोकामना जरूर पूरी होती है। बशर्ते मनोकामना में किसी का अहित न हो। जब आप मंदिर में जायेंगे तो देखेंगे हज़ारों अर्ज़ियाँ बाबा के दरबार में घंटियों से बंधी है। इसके पीछे एक पौराणिक कथा भी है। कहा जाता है की कत्युरि वंश के राजा झल राय की सात रानियाँ थी। सातों रानियों मे से किसी की भी संतान नही थी। राजा इस बात से काफ़ी परेशान रहा करते थे। एक दिन वे जंगल मे शिकार करने के लिए गये हुए थे जहाँ उनकी मुलाक़ात रानी कलिंका से हुई(रानी कलिंका को देवी का एक अंश माना जाता है)। राजा झल राय, रानी को देखकर मंत्रमुग्ध हो गये और उन्होने उनसे शादी कर ली।

कुछ समय बाद रानी गर्भवती हो गयीं। यह देख सातों रानियों को ईर्ष्या होने लगी। सभी रानियों ने दाई माँ के साथ मिलकर एक साजिश रची। जब रानी कलिंका ने बच्चे को जन्म दिया, तब उन्होंने बच्चे को हटा कर उसकी जगह एक सिल बट्‍टे का प्त्थर रख दिया। बच्चे को उन्होने एक टोकरे मे रख कर नदी मे बहा दिया।

वह बच्चा बहता हुआ मछुआरो के पास आ गया। उन्होंने उसे पाल पोसकर बड़ा किया। जब बालक आठ वर्ष का हुआ तो उसने उसने पिता से राजधानी चंपावत जाने की ज़िद की। पिता के यह पूछने पर की वह चंपावत कैसे जाएगा बालक ने कहा की आप मुझे बस एक घोड़ा दे दीजिए। पिता ने इसे मज़ाक समझकर उसे एक लकड़ी का घोड़ा लाकर दे दिया।

लेकिन बालक तो साक्षात भगवान ही थे। वो उसी घोड़े को लेकर चंपावत आ गये वहाँ एक तालाब मे राजा की सात रानियाँ स्नान कर रही थी। बालक वहाँ अपने घोड़े को पानी पिलाने लगा। यह देख सारी रानियाँ उसपर हस्ने लगीं और बोलीं- “मूर्ख बालक लकड़ी का घोड़ा भी कभी पानी पीता है?” बालक ने तुरंत जवाब दिया की अगर रानी कलिंका एक पत्थर को जन्म दे सकतीं हैं तो क्या लकड़ी का घोड़ा पानी नही पी सकता। यह सुन सारी रानियाँ स्तब्ध रह गयीं। शीघ्र ही यह खबर पूरे राज्य में फैल गयी। राजा की खुशियाँ लौट आईं उन्होने सातों रानियों को दंड दिया और नन्हे गोलू को राजा घोषित कर दिया।

तब से ही कुमायूँ मे उन्हे न्याय का देवता माना जाने लगा। धीरे धीरे उनके न्याय की ख़बरे सब जगह फैलने लगी। उनके जाने के बाद भी, जब भी किसी के साथ कोई अन्याय होता तो वह एक चिट्ठी लिखके उनके मंदिर मे टाँग देता और शीघ्र ही उन्हे न्याय मिल जाता। इसी लिए सिर्फ़ कुमायूँ मे ही नही बल्कि पूरे विश्व मे उन्हे कामना पूर्ति भी माना जाता है।

चितई गोलू देवता मंदिर

मंदिर में मैं

जागेश्वर धाम:- अल्मोड़ा से 35 किलोमीटर दूर स्थित केंद्र जागेश्वर धाम के प्राचीन मंदिर प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर इस क्षेत्र को सदियों से आध्यात्मिक जीवंतताप्रदान कर रहे हैं। यहां लगभग 250 मंदिर हैं जिनमें से एक ही स्थान पर छोटे-बडे 225 मंदिर स्थित हैं। इसे बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। और यहाँ का वातावरण बेहद शांत और आकिर्शित है।

जागेश्वर धाम

मंदिर में मैं

वृद्ध जागेश्वर:- जागेश्वर धाम से लगभग 5 किलोमीटर दूर वृद्ध जागेश्वर मंदिर है। कहते है यहाँ भगवान स्वयंभू है। और यहाँ का वातावरण बेहद मनमोहक है ठंडी ठंडी हवा और शानदार नज़ारे आपको वापिस आने नहीं देंगे।

वृद्ध जागेश्वर मंदिर

मंदिर से मनमोहक नज़ारे

कसार देवी मंदिर:- यह मंदिर दूसरी शताब्दी का है। स्वामी विवेकानन्द 1890 में यहाँ आये और साधना की थी। इसके अलावा अनेकों पश्चिमी साधक यहाँ आये और रहे। यह क्रैंक रिज के लिये भी प्रसिद्ध है जहाँ 1960-70 के दशक के हिप्पी आन्दोलन में बहुत प्रसिद्ध हुआ था।

यहाँ का नज़ारा बेहद शानदार है आपको ऐसा महसूस होगा की जैसे आप पहाड़ों से काफी ऊपर आ गए हों।

कसार देवी मंदिरg

मंदिर से सूर्यास्त

मंदिर के पास से दिखता शहर का नज़ारा और मैं

 

 

डोली दान मंदिर:- जो माता का मंदिर है। यह अल्मोड़ा से लगभग 3-4 किलोमीटर पहले है। मंदिर तक जाने के लिए थोड़ी सी ट्रेकिंग करनी पड़ेगी आगे चलकर 111 सीढियाँ आएँगी जिसे पार करके आप मंदिर में प्रवेश करेंगे। यह जगह बेहद रमणीक जगह है। और यहाँ सूर्योदय और सूर्यास्त का नज़ारा बेहद शानदार रहता है। मंदिर के पास ही बहुत बड़ा फील्ड ग्राउंड है यहाँ आप पूरा दिन भी बिता सकते है। इसके पास आर्मी की फायरिंग रेंज भी है। यहाँ घूमकर भी आनंद लिया जा सकता है।

दूर दिखता मंदिर

मंदिर से सूर्यास्त का शानदार नज़ारा

मंदिर के पास बड़ा फील्ड ग्राउंड

स्वामी विवेकानंद और अल्मोड़ा :- कहते हैं कि अल्मोड़ा वह नगरी है जैसे स्वामी विवेकानंद का गहरा रिश्ता रहा है। स्वामी विवेकानंद यहां दो बार आए और कई दिनों तक रहकर साधना की। पहली बार 1890 की यात्रा के दौरान काकडी घाट में स्थित पीपल के पेड़ के नीचे उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ था। अल्मोड़ा मैं वह कई दिनों तक खंजाली मोहल्ले में स्व. बद्री शहाजी के मेहमान बन कर रहे। 11 मई 1897 के दिन घनसाली बाजार में उन्होंने जनसमूह को संबोधित किया।

स्वामी विवेकानंद ने अपने संबोधन में कहा था ‘यह हमारे पूर्वजों के स्वप्न का प्रदेश है। यह वही भूमि है जहाँ निवास करने की कल्पना मैं अपने बाल्यकाल से ही कर रहा हूं। मेरे मन में इस समय हिमालय का 1 केंद्र स्थापित करने का विचार है और संभवतः मैं आप लोगों को भली भांति यह समझाने में समर्थ हुआ हूं कि मैंने अन्य स्थानों की तुलना मैं इस स्थान को सार्वभौमिक धर्म शिक्षा के एक प्रधान केंद्र के रूप में चुना है।’
उन्होंने आगे कहा इन पहाड़ों के साथ हमारी जाति की श्रेष्ठतम स्मृतियां जुड़ी हुई है। यदि धार्मिक भारत के इतिहास से हिमालय को निकाल दिया जाए तो उसका अस्त्तिव ही खत्म हो जायेगा। अतएव यहां एक केंद्र अवश्य चाहिए। मुझे आशा है कि एक ना एक दिन मैं इसे स्थापित कर सकूंगा।
उल्लेखनीय है कि 1916 में स्वामी विवेकानंद के शिष्यों स्वामी तुरियानंद और स्वामी शिवानंद ने अल्मोड़ा में ब्राइटएंड कॉर्नर पर एक केंद्र की स्थापना कराई। जो आज रामकृष्ण कुटीर के नाम से जाना जाता है।
चलिए आज के लिए इतना ही आगे भी आपको किसी और शहर की यात्रा पर लेकर चलेंगे तब तक आप कहीं मत जियेगा ऐसे ही बने रहिये मेरे साथ।
आपका हमसफर आपका दोस्त
हितेश शर्मा

 

 

 

 

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12 thoughts on “ध्यान और अध्यात्म का केंद्र अल्मोड़ा”

  1. sunita dube says:

    wow wonderful divine place thanks for the superb description.

    1. ghumakkri says:

      Thanks Sunita Di

  2. Vikram singh says:

    अत्यन्त मनोहर व रमणीय स्थान ।बहुत अच्छा विवरण।
    जय देवभूमि।

    1. ghumakkri says:

      धन्यवाद विक्रम जी

  3. बड़े समय बाद शब्दों का प्रवाहमय प्रयोग करते हुए आपका लिखा लेख पढ़ा.. अच्छा है

    1. ghumakkri says:

      धन्यवाद जी

  4. अपने शहर के बारे में पढ़कर काफी अच्छा लगा। अल्मोड़ा के बारे में विस्तार से लिखा है मैंने।

    1. ghumakkri says:

      धन्यवाद हर्षिता जी मैंने जाने से पहले आपका लेख पढ़ा था।

  5. Vasant patil says:

    सूंदर यात्रा वर्णन हितेश भाई

    1. ghumakkri says:

      धन्यवाद वसंत जी

  6. Hardik says:

    Excellent post and beautiful pics

    1. ghumakkri says:

      Thanks Hardik Ji

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