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घना अंधेरा और राजाजी नेशनल पार्क

9 Comments


25 जुलाई 2017 को दिन भर सुनीता जी के साथ सदर बाजार में खरीदारी की और शाम होते होते ही कनॉट प्लेस के श्री लैदर से एक चप्पल खरीद ली। और रात 8 बजे पुरानी दिल्ली अपने घर आ गया। जैसे किसी को सिगरेट की हुड़क सी लगती है वैसे ही एकदम से मुझे घूमने की हुड़क लगी यार कहीं 300 किलोमीटर तक घूमने जाया जाए और थोड़ा साहसिक सा कार्य किया जाए। तो 9 बजे खाना खाने के बाद लगभग 10:30 बजे निकल पड़ा कश्मीरी गेट बस अड्डा और उत्तराखण्ड वाले स्टॉप की तरफ पहुंच गया देखा तो हरिद्वार ऋषिकेश की बस खड़ी थी मैं उसी में बैठ गया। मैंने कोई पहले से प्लान नहीं बनाया था कि हरिद्वार ही जाना है। बस में बैठ जाने पर लगभग 11 बजे बस चल पड़ी। कश्मीरी गेट से निकलकर अभी शास्त्री पार्क पहुंची वहां से कुछ सवारी चढ़ी और जैसे ही बॉर्डर आया तो मुझे नींद का गई।

सोते सोते पता ही नहीं चला कब आधा रास्ता बीत गया और खतौली जाकर बस रुकी। रात भरपेट खाना खाया था तो कुछ खाने का मन नहीं था। लगभग 20 मिनट बाद बस चली और मैं फिर सो गया। अब नींद हरिद्वार पहुंचकर ही खुली। सुबह 5 बज रहे थे मैन कनखल चौक बाजार के लिए रिकशा किया और पहुंच गया अपने ननिहाल। वहां जाकर 10 बजे तक सोया। फिर नाश्ता करने के बाद कुछ पुराने दोस्तों से मिलना हुआ। उसके बाद दोपहर में वापिसी घर आ गया। वैसे तो हरिद्वार में सब जगह मेरी घूमी हुई है पर मन बनाया था कि शाम की राजाजी नेशनल पार्क जाऊंगा और वहां रात में कुछ देर रुकेंगे।

हसीन नज़ारे

शाम होते ही राजाजी नेशनल पार्क जाने के लिए हम 4 लोगो की टोली बन गई 1 बाइक और 1 स्कूटी तैयार है। इन्ही से हम निकल पड़े शाम 5 बजे चिल्ला के रास्ते गंगा किनारे मौसम बड़ा सुहावना बना हुआ था जो बार बार बस ये कहे जा रहा था कि कुछ देर ठहर जाओ तटस्थ हो जाओ। मौसम की नजाकत को समझते हुए हम कुछ देर ठहर गए और चाय की चुस्की के साथ पेटीज़ खाई गई। कुछ फोटो खींचने के बाद फिर चल पड़े।

ये शाम मस्तानी मदहोश किये जाये

हसीन रास्ते

लगभग अंधेरा होने लगा था ऋषिकेश बैराज से थोड़ा पहले हम जंगल मे घुस गए। सुनसान जंगल घना अंधरा और हम 4 मानव लेकिन पता नहीं और कितने प्राणी और इस जंगल मे हो। बाइक हमने जंगल मे प्रवेश करने से पहले ही खड़ी कर दी। और जंगल मे पैदल प्रवेश किया। आगे आगे लोकेश चल रहे थे फिर मैं मेरे पीछे वंश और सबसे पीछे वंश का दोस्त।

बाइक और स्कूटी यहां शुरू में खड़ी कर दी

अंदर जंगल मे

हमने तय किया था कि 20 मिनट जंगल की तरफ चलेंगे और फिर वापिस आएंगे लेकिन अंदर जाते हुए ऐसी चुम्भकीय शक्ति हमे जंगल की तरफ खींच रही थी कि कब 30 मिनट हो गए पता ही नहीं चला अच्छे से अंधेरा हो चुका था। जुगनू चमकने लगे थे और सन्नाटे में जानवरों की आवाज सुनकर वंश और उसका दोस्त घबराने लगे थे। आखिर कोई इस तरह रात में जंगल मे जाता है क्या..?? लेकिन ये भी एक मज़ा है

अंधेरा लगभग हो चुका

जंगल में हम चार

खैर लगभग रात 8:30 बजे हम अपनी बाइक के पास आ गये और उन्ही हसीन रास्तों से होते हुए नानी के घर आकर खाना खा कर सो गया और फिर क्या था सुबह वापिस अपने शहर दिल्ली के लिए चल पड़ा।

आज के लिए इतना ही आगे भी आपको किसी और जगह की सैर पर लेकर चलूंगा ऐसे ही बने रहिये मेरे साथ।
आपका हमसफर आपका दोस्त
हितेश शर्मा

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9 thoughts on “घना अंधेरा और राजाजी नेशनल पार्क”

    1. ghumakkri says:

      धन्यवाद मित्र

  1. Shah Nawaz says:

    इतनी रात में जंगल मे घुसना वाकई हिम्मत का काम है 🙂

    1. ghumakkri says:

      बिल्कुल शाहनवाज भाई वैसे रात में मज़ा बहुत आया।

  2. Mahesh gautam says:

    वाह

    1. ghumakkri says:

      धन्यवाद जी

  3. ghumakkri says:

    धन्यवाद सभी का

  4. एक बार इधर मै भी गया था पर दोपहर में,,, हाथी व जंगली जानवरों को पानी पीने के लिए एक छोटा तालाब बना था। जिसे देखकर हम वापिस आ गए। वैसे जंगल से ज्यादा डरावना इंसान का भय होता है। छोटी यात्रा आलेख पर यादें ताजा करने के लिए काफी था।

    1. ghumakkri says:

      जी बिल्कुल सही कहा धन्यवाद

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